
Books by Dr. Sanjeev
Sanjeev’s Blog
उत्सव के नीचे दबा हुआ राष्ट्र
उत्सव के नीचे दबा हुआ राष्ट्र धीरे-धीरेइस देश मेंउत्सव मनाए नहीं जाने लगे—प्रसारित किए जाने…
“जब जनता ने दर्पण खो दिए”
बहुत दूररेत और नमक के बीचएक राज्य था—नाम अब इतिहास की धूल में दब चुका…
रुकने की कीमिया
मनुष्यअक्सर चलता नहीं,चलाया जाता है। उसकी सुबहेंपहले से लिखी हुई होती हैं।उसकी प्रतिक्रियाएँपुरानी रिकॉर्डिंगों की…
“इत्र की शीशी में बंद बचपन”
अब बच्चे पैदा नहीं होते,तैयार किए जाते हैं। जन्म के तुरंत बादउनकी आँखों में आकाश…
“अनुपयोगी होने का साहस”
दुनिया ने मनुष्य कोधीरे-धीरे औज़ार में बदल दिया। पहले उसके हाथ खरीदे गए,फिर उसका समय,फिर…
“प्रतिध्वनि के पार”
मनुष्य ने सबसे पहलेरोटी नहीं बनाई थी—उसने अँधेरे मेंदीवार पर एक आकृति बनाई थी। क्योंकि…
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